ज्यादा कुछ नहीं। ज्यादा कुछ नहीं बस थोड़ा सा वक़्त और चाहता था मैं। वक़्त के और तुम्हारे साथ बहिं ठहर जाना चाहता था मैं। कुछ तो हुआ था इस बार जो पहले से अलग था। बस उसी अलग से एहसास को बताना चाहता था मैं। मुझे नहीं मालूम में गलत था या सही। बस हम मिल जाते फिर से कहीं ना कहीं। तुम्हारे साथ बस एक मुलाकात और चाहता था मैं। ज्यादा कुछ नहीं बस थोड़ा सा वक़्त और चाहत था मैं। तुम्हारी याद आयेगी तो खुद को संभालेंगे कैसे। तुम्हारी बातों को दिल से निकालेंगे कैसे। जब भी फुरसत मिले तो बस हमें याद करना। बरना तुम्हारी यादों के बिना हम जीयेंगे कैसे। बस उन यादों के सहारे ही तो जीना चाहता था मैं। ज्यादा कुछ नहीं बस थोड़ा सा वक़्त और चाहता था मैं। तुम दिल के करीब हो एक ज़माना हो गया है। चांद भी तुम्हारी याद में अब सितारा हो गया है। कभी तुम्हारा इनकार तो कभी हम मना करते रहे। तुम्हे सोचते सोचते वक़्त पुराना हो गया है। उस वक़्त को फिर से दोहराना चाहता था मैं। ज्यादा कुछ नहीं बस थोड़ा सा वक़्त और चाहता था मैं। #danishsaifi06 #danishsaifi #loveshayari
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